विंटर ब्रेक
शोध कहते हैं कि साइकिल सेहत और पर्यावरण के लिए अच्छी है। वाहनों की बढ़ती संख्या और प्रदूषण की वजह से हालात दमघोंटू होते जा रहे हैं। सर्दी में स्थिति और अधिक खराब हो जाती है। खांसते और हांफते लोगों के लिए प्रदूषण बड़ी समस्या बन चुका है। ऐसे में साइकिलिंग एक बेहतर विकल्प है। यूरोप में साइकिलिंग को लेकर लोग जुनूनी हैं। साइकिल ट्रैक सड़कों की तरह बिछे हैं। इसके 10 फायदे पर गौर करेंगे तो आपको भी साइकिलिंग से प्यार हो जाएगा।
- सेहत के लिए लाभदायक है
- ईको फ्रेंडली है
- पैसे बचाती है
- वक्त बचाती है
- प्रकृति के करीब लाती है
- जागरूक बनाती है
- सामाजिक बनाती है
- फ्रेंडशिप बनाती है
- सकारात्मक बनाती है
- जड़ों से जोड़े रखती है
महानगरों में पैर पसारते प्रदूषण को हराने में साइकिल कारगर सिद् हो सकती है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद जैसे बड़े शहर और इनके आसपास के छोटे शहरों में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। मानव निर्मित प्रदूषण ने सांस लेना दूभर कर दिया है। अब लापरवाही से काम चलने वाला नहीं है। चार पहिया वाहनों की बढ़ती बिक्री बढ़ती जा रही है। साइकिल को अपनाने से प्रदूषण को कम किया जा सकता है। ये कहना आसान है, लेकिन सामूहिक कोशिश और अभियान के जरिये कामयाबी हासिल की जा सकती है।
साइकिलिंग को बढ़ाने के लिए कोशिश की गई हैं। उत्तर प्रदेश में सपा के कार्यकाल में नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ शहर में साइकिल ट्रैक बनाए गए थे। मंशा अच्छी थी, ट्रैक जर्जर हो गए। अतिक्रमण हो गया। उन पर साइकिल की जगह अव्यवस्था दौड़ पड़ी। और अधिक प्रयास करने की जरूरत है। साइकिलिंग के लिए जन जागरूकता करनी होगी। समर्थन के लिए सरकारी सिस्टम को खड़ा होना होगा। बार-बार हर बार कोशिश करनी होगी। जब तक की साइकिल दौड़ने न लगे। साइकिल दौड़ने से जिंदगी की गाड़ी पटरी पर आएगी।
चीन के शंघाई शहर में साइकिलिंग लोगों के जीवन का जरूरी हिस्सा है। वह बिना साइकिल के अपने जिंदगी को रफतार नहीं दे सकते। करीब ढाई करोड़ आबादी वाले इस शहर में कर्मचारी साइकिल से ऑफिस जाते हैं। जाम की समस्या से निपटने में साइकिल कारगर सिद्ध हुई। साइकिलिंग के ट्रैक बड़ी संख्या में बनाए गए हैं। उन पर आम और खास साइकिलिंग करते दिख जाएंगे। शंघाई से हम सीख सकते हैं। ढांचा और निगरानी उपलब्ध कराने के अलावा लोगों को इसके लिए प्रोत्साहित करना होगा।
नीदरलैंड साइकिलिंग को लेकर जाना जाता है। राजधानी आर्मस्टडम की यह लाइफलाइन है। दुनिया के सबसे ज्यादा साइकिलिस्ट यहीं पाए जाते हैं। एम्स्टर्डम में करीब 500 किमी लाइन साइकिलिंग के लिए हैं। बच्चे, जवान और बूढ़े साइकिल पर घूमते और आते-जाते मिल जाएंगे। शहर के करीब आधे हिस्से को साइकिलिंग ट्रैक ने कवर कर रखा है। डेनमार्क, स्वीडन, जर्मनी, फिनलैंड, स्विटजरलैंड और बेल्जियम आदि देश साइकिल को अपने जीवन का हिस्सा बना चुके हैं। यहां की सड़कें साइकिल सवारों से गुलजार रहती हैं।
- सरकारों को साइकिलिंग के लिए गंभीर होना होगा। ट्रैक बनाने के अलावा साइकिलिंग बढ़ावे के लिए जागरूक करने और योजनाओं का सहारा लेना चाहिये।
- शिक्षण संस्थानों के बड़े-बडे़ कैंपस में छात्र साइकिल रखते हैं। आईआईटी जैसे संस्थान में शिक्षक और छात्र क्लासरूम और लैब जाने के लिए साइकिलिंग उपयोग में लाते हैं। इनसे सीख लेनी चाहिए।
- विश्वविद्यालय कैंपस बड़े होते हैं। देश में इनकी संख्या एक हजार से अधिक है। सभी कैंपस में साइकिलिंग कोट्रांसपोर्ट का एकमात्र विकल्प बनाना चाहिये।
- कंपनियों को अपने कर्मचारियों को साइकिलिंग के लिए प्रेरित करना चाहिये। इसके लिए इंसेंटिव जैसी स्कीम शुरू की जा सकती है।
- शिक्षण संस्थान और वर्किंग प्लेस पर साइकिलिंग के महत्व को समझना और बढ़ाना होगा।
सटीक सलाह
जवाब देंहटाएंधन्यवाद।
हटाएंVery nice and important. Thanks from the bottom of heart.
जवाब देंहटाएंधन्यवाद मैम।
हटाएंNice
जवाब देंहटाएंThanks.
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