संदेश

language लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विंटर ब्रेक

चित्र
सर्दी अकेली नहीं आती। अपने साथ विंटर ब्रेक, कोहरा, गलन भी लाती है। पहाड़ों पर बर्फ और मैदान पर शीतलहर का राज चलता है। एक चीज और लाती है सर्दी अपने साथ। न्यू ईयर। नये साल के जोश में चूर हम ठंड को ओढ़ते और बिछाते हैं। होटल, रेस्टोरेंट और सड़क पर जश्न मनाते हुए सर्दी का स्वागत करते हैं। सड़क पर ही बहुत से लोगों को कड़कड़ाती सर्दी सीमित कपड़ों और खुले आसमान में गुजारनी होती है।  चाय, काॅफी पीते और तापते हुए बोलते हैं ऐसी नहीं पड़ी पहले कभी। सर्दी का यह तकियाकलाम अखबारों में रोज रिकाॅर्ड बनाती और तोड़ती हेडलाइन को देखकर दम भरता है। मुझे विंटर ब्रेक का इंतजार औरों की तरह नहीं रहता। मैं पहाड़ों की जगह अपनी रजाई में घूम लेता हूं। मनाली, नैनीताल और मसूरी में गाड़ियों की कतार मुझे अपनी ओर नहीं खींच पाती। क्योंकि पत्नी और बेटे की छुट्टी रहती है और बाहर हम कम ही जाते हैं इसलिए मेरे ड्यूटी कुछ सख्त हो जाती है। रूटीन बेपटरी होने की शुरुआत अलार्म नहीं बजने से होती है। देर से सोना और सुबह जब मन करे उठना यह एैब इंसान को बर्बाद कर सकता है। दुनिया से काट देता है।  सर्दी बच्चों को बेकाबू होने की छूट देती...

भाषाओं के बढ़े भाव, संस्कृत निकलेगी श्लोकों से बाहर

चित्र
मातृभाषा में पढ़ाई को लेकर गेंद रहेगी राज्यों के पाले में नई शिक्षा नीति के बहाने भाषाएं चर्चा में हैं. मातृभाषा में पढ़ाई को लेकर बहस छिड़ चुकी है. संभव है कि आने वाले समय में आस्तीन चढ़ाकर इस पर विचार विमर्श का दृश्य देखने को मिले. साबित तौर पर कह सकते हैं कि हम भाषाओं को सीरियसली नहीं लेते. न अच्छे से हिंदी आती है और अंग्रेजी की तो पूछिए मत. देश में करीब 800 भाषाएं बोली जाती हैं. भाषा के धुरंधर होनहार ही होंगे इसकी कोई गारंटी नहीं दे सकता. भाषा भेदभाव की चीज नहीं है. यह तो लोगों को जोड़ती है. हमने ही हिंदी और अंग्रेजी वाली दीवारें खींची हैं. अहम है कि भाषा को लेकर हमारा भाव कैसा है. अगर वह अच्छा और सम्मान भरा है तो दिक्कत की कोई बात नहीं है. खैर, यह समय भाषाओं और उनकी व्यवहारिकता पर नजर डालने का है. पांचवीं पास होंगे भाषा में तेज वैज्ञानिक तथ्य है कि 85 प्रतिशत दिमाग का विकास छह साल की उम्र तक हो जाता है. इसलिए बच्चों की सीखने की क्षमता तेज होती है. नीति में बताया गया है कि दो साल से लेकर आठ साल तक की उम्र में बच्चे भाषा तेजी से सीखते हैं. ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस उम्र में अक्सर ...

बातों ही बातों में हो न जाए कोरोना

चित्र
जानकारों का कहना शब्दों के बोलने में बरतें सावधानी कुछ शब्दों के चयन से कम कर सकते हैं ड्रॉपलेट्स कोरोना को लेकर जितने मुंह उतनी बातें हो रही हैं. जानकार जोर से बात न करने की सलाह दे रहे हैं. उनका तर्क है कि तेज बोलने से ड्रॉपलेट्स (छोटी बूंद) के जरिये लोग संक्रमित हो रहे हैं. ऐसे में कम बोलना और चुप रहना लाभदायक है. आपने कभी गौर किया है दिन में हम ऐसे बहुत से शब्द बोलते हैं,   जिनसे ड्रॉपलेट्स बाहर आते हैं. आखिर कौन से हैं वो शब्द? उनकी जगह हम कौन से शब्द इस्तेमाल कर सकते है? आइये आपके इन सवालों के जवाब देते हैं. धीरे-धीरे बोल कोई... जोर से बोेलना सभ्य नहीं माना जाता. धीरे-धीरे बोलने के अपने फायदे हैं. कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए डॉक्टर और वैज्ञानिकों ने मुंह पर मास्क लगाने की सलाह दी. इसका लोग पालन भी कर रहे हैं. मुंह पर मास्क लगाने का लॉजिक यह है कि कोरोना वायरस ड्रॉपलेट्स के जरिये संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है. ऐसे में डॉक्टर लोगों को दूरी बनाने और धीरे बोलने की सलाह दे रहे हैं. जोर स...